बारिश

कितनी भिंगी भिंगी मौशम हैं,
मेरे सनम इस बारिश में,
देखों चांद उतर आया झिल की ठहरी पानी में.
लिखता हुं में नाम तेरा.
हर बार रेत की यारी में.
तोङ देती दिल मेरा लहराती झील की पानी में.....१

सपना नही तुम 
हो मेरी यादो की कोरी हकीकत .
ना हाकिम रहा अब तेरे दर्द का.
जो लिख सकु नाम सुनहरी रेत पर.
याराना है, उसका भी पुराना तुमसे .
तोड़  देती दिल मेरा लहराती झील की पानी में.....२

#अवध 🌠

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