प्रेम

कुछ धागे मोहे हमको है.
जीवन में हम बहके - बहके है.
मेरी ललीता मेरी प्रेयसी.
फागुन में प्रित ठहरी - ठहरी है.

छोड़ दो जग भई बेगानी.
रखी कयां आंखो में दिवानी.
आ जाओ संग बरसो गोरी.
फागुन में प्रित ठहरी - ठहरी हैं.

#अवध
Aawadhesh kumar Rai.
Aw

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