लम्हा

हर लम्हा चाहता तुझे.
बेकरारी में निखारता तुझे.
कोई काठ की कठपुतली नहीं.

जो दिल को तोड़ दिया तुमने.
मैं सब्र की इंतहा हो चला.
मोहब्बत का.कुसूरवार हो चला.

#अवध

Comments

Popular posts from this blog

इकरार

Miscellanious

15 अगस्त से पहले दिल्ली की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश नाकाम, Police ने बरामद किया अवैध Telephone Exchange