मदहोश

केवल प्रेम नहीं  मैं कौतूहल हुं.
उनकी प्राणो कि मैं संगत हुं.
जैंसें मृग की प्रेम दिवानी.
छलित हुई वो पगली बेगानी हैं........१

अपने सजल विरह आँखों से बहती अश्को  कि दरिया.
ये कलुषित प्रेम दिवानी.
छलित हुई वो पगली बेगानी हैम...........२

कोरस हैं, सिर्फ कोरस पगली.
परिजात की खोज में भटकती सजनी.
हरण भय हैं, मृगशिरा के.
छलित हुई वो पगली बेगानी हैं............३

#अवध💃

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