आँखे

जब कतरा - कतरा आँखो से बह निकले हो सनम.
सनम कैंसे रोकु जींदगी से गुजरे हो तुम.

कल तक इन आँखो की रौशनी हो कहते.
आज क्यों अमावश की चांद हो निकले.

#अवध

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