दोशती

ए दोशत तेरी दोशती पे निसार हो ज्ञाऊ.
हर सितम मिटा दू तेरे उलफत के.

आज तेरी उदाश जिंदगी में रंग घोल दु.
जला दु हर जर्ररे में समा तेरे नाम का.

अवध

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