इज़हार
फरमान है, या इज़हार है, कुछ तो है, सनम जहाँ इंकार है, ना समझ नुसरत मेरी बातों को लफ़्फ़ाज़ी। दिल तेरे इश्क़ का फनकार है. लूट लो हमें अपने हुश्न से. दिल अक्लियतें तेरी इज़हार है. मैं फनकार तेरी तृष्णागी का. दिल तेरे इश्क़ का फनकार है. आज आये है, तौफ़ीक़ हमारे सब्र पर. दिल तम्मना तेरा इज़हार है. साकी मेरी महफ़िल वही. दिल तेरे इश्क़ का फनकार है, अवधेश कुमार राय "अवध"

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